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जल विद्युत वापस..

स्वच्छ, प्रभावी एवं पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील जलविद्युत को ईंधन का आदर्श स्रोत माना गया है। जलविद्युत अपने आप में ऊर्जा का एक नवीकरणीय, किफायती, गैर-प्रदूषणकारी और पर्यावरणीय रूप से कल्याणकारी स्रोत है। जलविद्युत स्टेशनों में तत्काल चालू और बंद किए जा सकने, लोड घटाने या बढ़ा सकने इत्यादि की अंतर्निहित क्षमता होती है और इससे विद्युत प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलती है। पीक समय की मांग पूरी करने के लिए जलविद्युत पहली पसंद है। इसकी उत्पादन लागत पर महंगाई का असर नहीं पड़ता और यह लागत समय के साथ घटती जाती है। जलविद्युत परियोजनाओं का 50 साल से अधिक तक का लंबा जीवनकाल होता है और इनसे सीमित फॉसिल ईंधनों के संरक्षण में मदद मिलती है। इनकी मदद से अगम्य एवं पिछड़े क्षेत्रों में विकास के नए द्वार खुलते हैं। भारत सरकार तथा हिमाचल प्रदेश सरकार के संयुक्त उपक्रम के रूप में 24 मई,1988 को स्थापित किए गए सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएन)- पूर्व नाम नाथपा झाकड़ी पावर कारपोरेशन लिमिटेड (एनजेपीसी) को ऐसी विद्युत परियोजनाओं की आयोजना, निष्पादन एवं प्रचालन करके देश की संभावित जल विद्युत क्षमता के दोहन का दायित्व सौंपा गया है।

भारत सरकार द्वारा 1998 में घोषित जल विद्युत संबंधी नीति के तहत देश में जल विद्युत के विकास पर बल दिया गया है। जल विद्युत के विकास के लिए अपने जल संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा निष्पादित रैकिंग अध्ययन में भविष्योन्मुखी निष्पादनीय परियोजनाओं का प्राथमिकीकरण एवं रैकिंग की गई है।

हमारे देश में 60 के लोड फैक्टर पर लगभग 84000 मेगावाट की अर्थिक रूप से दोहनीय एवं संभाव्य विशाल आकलित जलविद्युत क्षमता है (स्थापित क्षमता 1,48,701 मेगावाट) । इसके अलावा लघु, मिनी तथा माइक्रो जल विद्युत योजनाओं की 6781.81 मेगावाट की आकलित स्थापित क्षमता है। ऐसे 56 स्थलों की भी पहचान की गई है जिनमें पंपिग स्टोरेज योजनाओं के जरिए 94000 मेगावाट की समेकित स्थापित क्षमता हासिल हो सकती है। हालांकि, अभी तक केवल 15 संभाव्य जलविद्युत क्षमता का दोहन हो सका है और 7 विकास के विभिन्न चरणों में हैं। इस प्रकार 78 की संभावित जलविद्युत क्षमता के दोहन की कोई योजना नहीं बनी है। आकलित जल विद्युत संभाव्यता का बेसिनवार विवरण निम्नवत है :-

बेसिन/नदी

संभावित स्थापित क्षमता (मेगावाट)

सिन्धु बेसिन

33,832

गंगा बेसिन

20,711

भारत की केन्द्रीय नदी प्रणाली

4,152

दक्षिणी भारत की पश्चिमोन्मुखी नदियां

9,430

दक्षिणी भारत की पूर्वोन्मुखी नदियां

14,511

ब्रह्मपुत्र बेसिन

66,065

योग

1,48,701

जल विद्युत क्षेत्र के सम्मुख पेश आ रही कई समस्याओं के कारण जल विद्युत का अद्यतन दोहन इच्छित स्तर का नहीं है। इन समस्याओं में कई प्रकार की तकनीकी (दुष्कर अन्वेषण, सुंग प्रविधियों की अपर्याप्तता), वित्तीय (दीर्घावधिक वित्त पोषण की उपलब्धता में कमी), टैरिफ संबंधी मसले तथा प्रबंधकीय त्रुटियां (खराब संविदा प्रबंधन) शामिल हैं। जल विद्युत परियोजनाओं में अचंभितकारी भू-गर्भीय स्थितियों (खासकर हिमालयी क्षेत्र, जहां भूमिगत सुंगे बनानी पड़ती है), क्षेत्र की अगम्यता, भूमि अधिग्रहण तथ परियोजना प्रभावित परिवारों इत्यादि के पुनर्वास में विलंब होने जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

   

सर्वाधिकार सुरक्षित एसजेवीएन लिमिटेड