बेहतर जीविकोपार्जन हेतु दक्षता उन्नयन छात्रवृत्तियां
एसजेवीएन अपनी कोई भी परियोजना शुरू करते समय निवासियों की जरूरतों के प्रति जागरूक रहता है तथा उनके सामाजिक कल्याण के उपाय करता है और परियोजना प्रभाव क्षेत्र के मानव संसाधन विकास में अपना योगदान देता है। सतलुज घाटी में आरएचईपी से संबंद्ध कई लाभों के अलावा युवा छात्रों के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रम की एक नई पहल की गई है जो बेहतर रोजगार हेतु वोकेशनल कोर्स करने के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराती है।
तकनीकी शिक्षा छात्रवृत्ति के तहत स्कूलों से उत्तीर्ण हो चुके या कालेजों के ऐा÷ छात्रों को मदद दी जाती है जो औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में, जहां प्रायोजित अभ्यार्थियों के लिए सीटें आरक्षित रखी जाती हैं, दक्षता विकास प्रशिक्षण के जरिए रोजगार की तलाश में हैं।
सितंबर,2006 में शुरू की गई इन छात्रवृत्तियों से बायल, गडेज एवं वाबा गांव के परियोजना प्रभावित परिवारों तथा परियोजना प्रभावित क्षेत्र से संबंिधत 140 छात्र (2006-07, 2007-08, 2008-09 एवं 2009-10 में प्रत्येक 35) लाभान्वित हो चुके हैं।
परियोजना प्रभावित परिवारों में से एक 31 वर्षीय युवक सागर चन्द का ही उदाहरण लें। सागर चंद कहते हैं "एसजेवीएन ने अपने तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम के तहत बड़े सही समय पर वजीफा उपलब्ध कराया, क्योंिक इसके जरिए आई.टी.आई शिमला से 2006-08 के दौरान मैकेनिकल ट्रेड में प्रशिक्षण ग्रहण करने में मदद मिली।
अपना प्रशिक्षण जुलाई,2008 में पूरा होने के बाद सागरचंद ने चार माह का ब्रेक लिया और दिसंबर तक उसे झाकड़ी में परियोजना क्षेत्र में निर्माण कार्य में लगी कंपनी में बतौर मोटर मैकेनिक की नौकरी भी मिल गई।
प्रशिक्षणावधि के दौरान एसजेवीएन द्वारा दो साल के प्रशिक्षण के दौरान प्रदत्त 800 रुपए प्रतिमाह के वजीफे के कारण वे अपने कोर्स बेफिक्र होकर पूरा कर सके। उन्हें यह राशि चेक के जरिए या उनकी ओर से लेने के लिए अधिकृत व्यक्ति को दी गई।

सागरचंद का कहना है कि उन्हें नाहन, बद्दी तथा अन्यत्र भी नौकरी के ऑफर थे परंतु अपने गांव के निकट नौकरी मिलने से वे खाली समय में खेतीबाड़ी तथा अन्य कामकाज में परिवार की सहायता कर सके।
उनके अतिरिक्त ऐा÷ और भी लोग है जिन्होंने एसजेवीएन के वजीफे की मदद से वोकेशनल ट्रेनिंग ली और अब परियोजना क्षेत्र के अंदर नौकरीयाफ्ता हैं।
बायल गांव के निवासी श्री ताराचंद ऐा÷ ही 412 मेगावाट की आरएचईपी के परियोजना प्रभावित परिवार के एक और युवा हैं जिन्होंने आईटीआई, शिमला से सिविल ट्रेड में दो साल की ट्रेनिंग ली। सागरचंद के समान उनकी ट्रेनिंग का एसजेवीएन ने अंशतः वित्तपोषण किया।
अपनी दक्ष अर्हता के आधार पर ताराचंद को एक बड़ी निर्माण ठेकेदार कंपनी पटेल इंजीनियरिंग में नौकरी मिल गई। इस कंपनी को रामपुर परियोजना में ही एसजेवीएन से एक बड़े निर्माण कार्य का ठेका मिला हुआ है।
इस युवक ने ईमानदारी तथा कड़ी मेहनत के जरिए कैरियर में सतत प्रगति है तथा उन्हें सिविल पर्यवेक्षक का दायित्व भी सौंपा जा चुका है। बायल गांव के एक अन्य युवा निवासी तथा एसजेवीएन कार्यक्रम के लाभग्राही दिनेश कुमार ने भी विद्युत ट्रेड में ट्रेनिंग प्राप्त करके अपने गृहस्थान के निकट बीएचईएल (भेल) में आरएचईपी के निकट उनकी वर्कशाप में नौकरी हासिल करने में कामयाबी प्राप्त की है।
जनक भण्डारी भी एसजेवीएन के कार्यक्रम के एक और ऐा÷ लाभग्राही हैं जो कांगड़ा के एक संस्थान से जूनियर इंजीनियर का कोर्स कर रहे हैं।
वजीफे के कार्यक्रम से परियोजना प्रभावित समुदाय के मध्य एक अट्टू बन्धन कायम हुआ है तथा एसजेवीएन की नीति का अंग बन चुके इस कार्यक्रम को अब इसके द्वारा शुरू की जाने वाली सभी परियोजनाओं में चलाया जाएगा।