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रामलाल के लिए यह युगांतकारी बदलाव है
एसजेवीएन पुनर्वास कॉलोनी के 38 वर्षीय वासी श्री रामलाल की एक पीढ़ी के अंदर इससे ज्यादा हसरत नहीं होती थी कि सुस्त कृषकीय जीवन के बजाय रहने के लिए ड्राइव-इन कॉलोनी सहित उनकी शहरी जीवन शैली हो।
वो याद करते हैं कि 1990 के शुरू में परियोजना की खातिर जब उनके पिता तुशू राम (उम्र 60 वर्ष) की जमीन ली गई तो उस समय भविष्य अनिश्चित था।
एसजेवीएन द्वारा परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए यादे पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना क्रियान्वित न की जाती तो पीढ़ियों से किसान रहे झाकड़ी के छोटे से कृषक समुदाय के लिए खुद के बिना किसी जमीने के पाना पीड़ादायी होता।
कंपनी की नीति में यह पक्की व्यवस्था थी कि कोई भी प्रभावित परिवार सुरक्षाविहिन या भूमिहीन नहीं रहना चाहिए।
परियोजना अधोसंरचना की खातिर अपनी सारी जमीन दे देने वालों का पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन निर्मित मकान एवं सततशील स्तर की न्यूनतम भूमि देकर किया जाएगा।
रामलाल ऐसे एक लाभान्वित हैं। वे कहते हैं कि " झाकड़ी परियोजना के आने से पहले जीवन बाहर से तो सरल प्रतीत होता था, लेकिन भीतर ही भीतर से यह कठोर था एवं गरीबी से जकड़ा हुआ था। "
एसजेवीएन की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पहल के तहत निर्मित पुनर्वास कॉलोनी के वासी तुशु राम के समूचे परिवार की सड़क, सतत बहते जल तथा स्तरीय शिक्षा एवं चिकित्सकीय देखभाल तक पहुंच है।
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| श्री रामलाल |
तुशु राम उन 45 परिवारों में से हैं जिन्होंने परियोजना की खातिर अपनी जमीनें दीं तथा इसकी एवज में परियोजना अधिकारियों ने निजी जमीनें खरीदकर तुशू राम तथा अन्य को इस ढंग से आबंिटत की कि आज प्रत्येक के पास न्यूनतम 5 बीघे जमीन है।
स्थानीय झाकड़ी बाजार के जरिए ऐसी तैयार मार्किट उपलब्ध है, जहां परिवार अपनी अधिशेष पैदावार बेच सकता है।
तुशु राम के दो पुत्रों में से एक को एसजेवीएन में पक्की नौकरी दी गई है। परियोजना से सर्वाधिक प्रभावित परिवार का पक्की नौकरी के साथ पुनर्स्थापन करना कंपनी की सामाजिक उत्तरदायित्व की नियमित सारणी का अंग बन गया है।
श्री रामलाल कहते हैं कि एसजेवीएन की मेहरबानी से मेरा पुत्र डीपीएस झाकड़ी में तालीम हासिल कर रहा है और मेरे पिता मेरे लिए ऐासा नहीं कर सकते थे।
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